कोरोना की दवा Faviflu का नुक़सान भी जान लीजिए 

मीडिया की गलियारों से लेकर मेडिकल फ़ील्ड और जनता के बीच इस बात की वाहवाही है कि भारत ने कोरोना की दवा बना लीहै। लेकिन बड़ा सवाल ये है की क्या ये दवा कोरोना को मात देने में 100 फ़ीसदी कारगर है? क्या वाक़ई इससे कोरोना मरीज़ठीक हो रहे हैं?  

BBC में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक़ फ़ैबिफ़्लू, रेमडेसिवियर की तरह ही एक एंटीवायरल दवा है जिसका इस्तेमाल पहले सेफ़्लू की बीमारी के इलाज में किया जाता रहा और भारत में ये दवा ग्लेनमार्क फ़ार्मा कंपनी बनाती है. लेकिन ये दवा कोरोना केमरिज़ों पर कितना असरकारक है यह दिखाने के लिए एक ताज़ा रीसर्च किया गया।

 यह रीसर्च भारत के 11 शहरों के 150 कोरोना मरीज़ों पर हुआ जिसमें से 90 मरीज़ ऐसे थे, जिन्हें हल्का संक्रमण था. जबकि 60 मॉडरेट संक्रमणवाले मरीज़ थे. 14 दिन तक लगातार इस दवा का सेवन करने के बाद कोरोना मरिज़ों हालात सुधरते दिखे जिसके बाद इसेकोरोना की कारगर दवा मान ली गयी। लेकिन गौर करने वाली बात ये है कि यह दवा अभी सिर्फ़ 80 फ़ीसदी ही कारगर है । 

फ़ैबिफ़्लू के सेवन के शर्त (नुक़सान)

इसके साथ ही इस दवा के सेवन करने के कुछ शर्त भी हैं। चुकि, इस दवा का पहला डोज़ 1800mg है और बाद में इसे डॉक्टर केसाला अनुसार इसकी डोज़ काम करके 800mg तक लाया जा सकता है । 

अतः हेवी डोज़ का दवा होने के कारण इसे लिवर किड्नी पेसेंट को नहीं देना है। इसके साथ pregnant महिला या ऐसी महिलाजो अपने बच्चे को दूध पिलाती हो या किसी को कोई गम्भीर बीमारी हो उसे यह दवा नहीं देनी है। 

फ़ैबिफ़्लू पर Doctors की क्या राय है?

डॉक्टर अरविंद, जो लंग केयर फ़ाउंडेशन से जुड़े हैं, उनके मुताबिक़ इस दवा का कोई गोल्ड स्टैंडर्ड टेस्ट जिसे RCT टेस्ट कहते हैंवो नहीं हुआ है. RCT का मतलब होता है रैडमाइज्ड कंट्रोल ट्रायल. पूरी दुनिया में किसी भी दवा को बिना इस ट्रायल के स्वीकारनहीं किया जाता है. लेकिन फ़ैबिफ़्लू के लिए ऐसा कोई टेस्ट नहीं किया गया है.

डॉक्टर अरविंद की दूसरी चिंता है कंपनी द्वारा किए गए 150 पेशेंट के टेस्ट के रिजल्ट की. हालांकि उनका कहना है कि कंपनी नेऐसा क्यों किया ये उन्हें नहीं मालूम. डॉक्टर अरविंद के मुताबिक़ कंपनी ने चीन और रूस के जिन ट्रायल का हवाला दिया हैदरअसल उन जगहों पर दूसरी दवाओं से तुलना की गई, जिनकी प्रमाणिकता साबित है.

उनके मुताबिक़ कम से कम 1000 पेशेंट पर इस दवा के ट्रायल के बाद ही इसे कोविड19 के इलाज के लिए कारगर साबितकिया जा सकता है.

नोट: इस दवा का सेवन डॉक्टर के निर्देशानुशार ही करें।

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