How to overcome with breakup in hindi: रिश्तों में दरार, ब्रेकअप ज़िन्दगी का एक ऐसा का पड़ाव है जहां से होकर लगभग सभी को गुजरना पड़ता है. लेकिन, अगर यही जख्म जब आपकी जिन्दगी पर भारी पड़ने लगे तो फिर ये लाइलाज नासुर बन जाता है. कहते हैं जिन्दगी में रिश्तें उपरवाले अर्थात ईश्वर तय करते हैं. लेकिन, यहां थोड़ा ठहरकर सोचना होगा कि ये बात सत-प्रतिशत सत्य है कि ईश्वर की मर्जी के बीना एक पत्ता भी नहीं हिलता.

इसलिए आपके जिवन में जो भी हो रहा है या जो कुछ भी होगा सब ईश्वर की मर्जी से ही होगा. लेकिन, यहां एक और सत्य छिपा है कि कुछ रिश्तें अगर भगवान बनाते हैं तो कुछ रिश्तें आप स्वयं. जिन्दगी में आप किसके घर पैदा होंगे?  कौन आपकी मां बनेंगी और कौन आपके पिता, भाई, दादा या दादी? यब सब ईश्वर तय करते हैं. इसपर आपका कोई ज़ोर नहीं चलता लेकिन, जिन्दगी में कुछ ऐसे भी रिश्ते होते हैं जिन्हें आप स्वयं चुनते हैं.

जैसे आपकी गर्लफ्रैंड कौन होगी? आपका ब्वॉयफ्रेंड कौन होगा? आपके दोस्त, प्रेमी या प्रेमिका, टीचर या मेंटर कौन होगा ये सब रिश्ते आप चुनते हैं. लेकिन आज यहां बात सिर्फ लव या दोस्ती करते हैं. क्योंकि, ये दोनों ऐसे रिश्तें हैं जो आपके जीवन पर बेहद गहरा प्रभाव डालते हैं. उदाहरण के तौर पर जरा समझने का प्रयास कीजियेगा.

आप अखबार पढ़ते होंगे या घर में टेलीविजन पर अकसर देखते होंगे कि फलाने के पिता का निधन हो गया, फलाने की मां अब नहीं रही लेकिन क्या आपने कभी ये सुना कि फलां के माता/पिता या भाई का देहांत हो गया इसलिए वह भी मर गया? नहीं! आमतौर पर ऐसा बिल्कुल भी नहीं होता. लेकिन, आप यह हमेंशा अपने आस-पास या किसी समाचार के माध्यम से देखते या सुनते होंगे कि फलाने की गर्लफ्रेंड मर गई या उसने धोखा दिया और फलाने ने आत्महत्या कर ली.

यह भी जरुर पढ़ें: रिश्तों की बुनियाद है उम्मीदें या फिर रिश्ते टूटने की वजहreason of heart break in hindi

आखिर ऐसा क्यों होता है? ये मां-बाप से ज्यादा गर्लफ्रेंड से इतना लगाव क्यूं? लगाव होना सही है लेकिन, उस लगाव में पड़कर खुद की जिन्दगी खत्म कर लेना बुझदिली है. आप उसके पिछे भाग रहे हैं जो आपका है ही नहीं! तो फिर उसके लिए अपनी जान क्यों कुर्बान करना. कई लोग रिश्तों में बेहद पोसेसिव हो जाते हैं. वह अपने प्रेमी या प्रेमीका के खोने से इतना डर जाते हैं कि वे अपने प्रेमी/प्रेमीका के सांसों तक पर पहरे लगा देना चाहते हैं.

यकिन मानिये ऐसे रिश्तों में इंसान को घुटन होने लगती है और नजदीकियां दुरियों में तब्दील हो जाती है. किसी ने कहा है कि अगर आप किसी से सच्चा प्यार करते हैं तो उसे आजाद छोड़ दीजिये, उसे जाने दीजिये. अगर वो लौट कर आये तो समझो वो आपका है और अगर वह लौट कर न आये इसका मतलब वो आपका कभी था ही नहीं! तो फिर जो आपका है ही नहीं उसके लिए खुद को क्यों खत्म करना!

Leave a Reply