Meaning and Definition of Direction and Counseling: निर्देशन और परामर्श में अंतर अर्थ और परिभाषा

●निर्देशन का अर्थ

निर्देशन एक ऐसी प्रक्रिया है।जिसमें एक व्यक्ति के द्वारा दूसरे व्यक्ति की समस्याओं के समाधान से संबंधित चीजों को बताया जाता है।निर्देशन किसी भी समस्या का समाधान स्वयं नहीं करता है बल्कि वह ऐसी विधियां बताता है।जिनका प्रयोग करके व्यक्ति समस्याओंका समाधान कर सकता है।

निर्देशन की परिभाषाएं

आर्थर जे. जोन्स के अनुसार निर्देशन की परिभाषा

“व्यक्तियों को बुद्धिमत्तापूर्वक चुनाव का समायोजन करने में दी जाने वाली सहायता या नवयुवकों को अपने से दूसरों से औरपरिस्थितियों से सामंजस्य करना सीखने के लिए सहायता देने की प्रक्रिया को ही निर्देशन कहते हैं ।

●निर्देशन के प्रकार

निर्देशन के प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं।

॰व्यक्तिगत निर्देशन ।

॰शैक्षिक निर्देशन ।

॰स्वास्थ्य निर्देशन ।

॰सामाजिक निर्देशन ।

॰व्यवसायिक निर्देशन।

निर्देशन की विधियां ( Methods of guidance)

॰व्यक्तिगत निर्देशन ।

॰सामूहिक निर्देशन।

●परामर्श का अर्थ

बालकों की समस्याओं के समाधान  करने के लिए किसी भी प्रकार की वैज्ञानिक राय की आवश्यकता होती है। यह वैज्ञानिक राय औरसुझाव परामर्श कहलाते हैं।

●परामर्श की परिभाषा निम्नलिखित है।

 “फुलमर” के अनुसार परामर्श की परिभाषा

“पूछताछ पारस्परिक तर्क वितर्क या विचारों का पारस्परिक आदान-प्रदान परामर्श कहलाता है।”

” बुनियादी तौर पर परामर्श के अंतर्गत व्यक्ति को समझना और उसके साथ कार्य करना होता है।जिससे उसकी अनन्य आवश्यकताओ,अभिप्रेरणाओ और क्षमताओं की जानकारी हो।और फिर उसे इनके महत्व को जानने  मे सहायता दी जाए।

●परामर्श के निम्नलिखित प्रकार होते हैं।

॰नैदानिक परामर्श ।

॰मनोवैज्ञानिक परामर्श ।

॰छात्र परामर्श ।

॰धार्मिक परामर्श ।

॰सामाजिक परामर्श ।

॰शैक्षिक परामर्श । 

॰वैवाहिक परामर्श ।

॰व्यवसायिक परामर्श ।

॰वैयक्तिक परामर्श ।

॰सामूहिक परामर्श।

●परामर्शदाता किसे कहते हैं?

परामर्शदाता किसी भी क्षेत्र के विशेषज्ञ होते है।इन्हें अंग्रेजी में काउंसलर के नाम से जाना जाता हैं। यह व्यक्तियों की समस्याओं केसमाधान संबंधी उपाय देते है।

●परामर्शदाता की विशेषताएं निम्नलिखित हैं।

॰उत्सव आधारभूत वृद्धि ।

॰शैक्षिक योग्यता ।

॰शिक्षण का अनुभव ।

॰प्रशिक्षण ।

॰गहन विशिष्ट जानकारी ।

॰पारस्परिक संबंध की भावना ।

॰कार्यानुभव।

॰स्वास्थ्य एवं बाह्य व्यक्तित्व ।

॰विशेष वैयक्तिक गुण।

॰समृद्ध सामान्य ज्ञान।

●परामर्श की विधियां निम्नलिखित है।

॰मौन धारण ।

॰पुनरावृत्ति ।

॰स्वीकृति ।

॰स्पष्टीकरण ।

॰मान्यता ।

॰सामान्य मार्गदर्शन ।

॰विश्लेषण ।

॰विवेचना ।

॰परित्याग ।

॰विश्वास।

●परामर्श के प्रमुख सिद्धांत निम्नलिखित हैं।

॰परामर्श एक प्रकार से शांत एवं एकांत पूर्ण स्थान पर होना चाहिए।

॰परामर्श देने वाले कक्ष में आवश्यकता से अधिक फर्नीचर ना हो।

॰कक्षा का वातावरण परामर्शदाता और परामर्श से प्राप्त करने वाले दोनों को शांति और सुविधा प्रदान करने वाला हो।

॰जिस समय परामर्श दिया जा रहा हो उस समय कक्षा में कोई भी व्यक्ति प्रवेश ना करें।

॰परामर्श की अवधि 30 या 40 मिनट से अधिक नहीं होनी चाहिए।

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