Why parshuram killed his mother some interesting facts about lord parshuram in hindi: क्या आप जानते हैं भगवान विष्णु के छठे अवतार माने जाने वाले भगवान परशुराम ने अपनी ही माता का वध कर दिया था. लेकिन क्यों? इसके पीछे का रहस्य बेहद कम लोग ही जानते हैं.. दरअसल, एक बार की बात है कि गन्धर्व राज चितरथ अप्सराओं के साथ नदी में विहार कर रहे थे.

उसी वक्त भगवान परशुराम की माता रेणुका उसी नदी के तट पर हवन हेतु पानी भरने आईं. उन्होंने गंधर्व राज चितरथ को जल में विहार करते देखा और वो मंत्रमुग्ध होकर चितरथ के सौन्दर्य को निहारती रह गई. इसलिए रेणुका को पानी भरकर वापस लौटने में बेहद देर हो गई. उधर उनके पति महर्षि जमदग्नी जो हवन आसन पर बैठे अपनी पत्नी के जल लेकर आने का इंतजार कर रहे थे. लेकिन, धिरे-धिरे हवन काल का समय बीत गया और माता रेणुका बेहद विलम्ब से पहुंची.

महर्षि जमदग्नि अपनी दिव्य शक्ति से रेणुका के विलम्ब का कारण जानकर अत्यंत क्रोधित हो उठे. उन्होंने अपनी पत्नी के आर्य मर्यादा विरोधी आचरण व मानसिक भ्यविचार के दंड स्वरुप अपने बड़े पुत्रों को माता की वध करने की आज्ञा दी.

परन्तु, मातृ मोह में तृप्त पुत्रों में से किसी का साहस नहीं हुआ कि वो अपने ही माता का वध करें. तब मुनि ने अपने तीनों पुत्रों को श्राप दे दिया जिससे उनकी विचार शक्ति नष्ट हो गई. उसके बाद महर्षि जमदग्नी ने सबसे आज्ञाकारी पुत्र परशुराम से कहा कि हे पुत्र! तुम अपनी माता समेत अपने तीनों भाईयों का भी वध कर दो. भगवान परशुराम बेहद चतुर थे वे अपने पिता की सामर्थ्य और शक्ति को जानते थे.

उन्हें ज्ञात था कि अगर माता रेणुका का वध नहीं करेंगें तो उन्हें भी पिता का श्राप भोगना पड़ेगा लेकिन, अगर वो पिता का कथन मान लेते हैं तो पिता जमदग्नी प्रसन्न होकर उन्हें मनचाहा वर देंगे. यही सोचकर भगवान परशुराम ने अपने माता समेत भाईयों का भी वध कर दिया. इससे पिता यानि ऋषि जमदग्नि बेहद प्रशन्न हुए और भगवान परशुराम को मनचाहा वर मांगने को कहा. भगवान परशुराम ने अपने पिता से तीन वरदान मांगे.

पहला माता रेणुका पुनर्जीवित हो जायें दूसरा उन्हें मृत्यू की स्मृति ना रहे और तीसरे वरदान के रुप में उन्होंने अपने तीनों भाईयों को पुनर्जीवित करने को कहा. ऋषि जमदग्नि ने परशुराम जी को तीनों वरदान तो दे दिया लेकिन, भगवान परशुराम पर मातृ हत्या का पाप चढ़ गया. जिसके बाद राजस्थान के चितौड़ में स्थित मातृ कुंडिया तीर्थ स्थान पर भगवान परशुराम ने घोर तपस्या कर मातृ हत्या के पाप से मुक्ति पाया. कहते हैं इस तीर्थ स्थान का निर्माण भी स्वयं भगवान परशुराम ने ही अपने फर्से से पहाड़ को काटकर किया था.

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