Why women are considered inauspicious/impure during periods in hindi: दुनिया के लभगभ सभी धर्मों में नारी को सर्वोच्च स्थान से नवाजा जाता है. हिन्दु सभ्यता की मानें तो नारी को देवी का रुप मानकर उनकी पुजा की जाती है. लेकिन, यही देवी जब महावारी यानी पीरियड्स के उन कठीन दिनों से होकर गुजरती है तो उसे अपने घर में अछुत सा सुलूक किया जाती है. उसे अशुद्ध मानकर घर के काम-काज से लेकर मंदिर आदि में पुजा-पाठ करने से भी प्रतिबंधित कर दिया जाता है.

महिलाओं को पीरियड्स क्यों आते हैं?

इस प्रश्न का उत्तर जानने के लिए प्राचीन काल की ओर रुख करना होगा. दरअसल, स्त्रियों में महावारी की शुरुआत भगवान शिव ने पार्वती के कहने पर किया था. भागवत पुराण की कथा के अनुसार, एक बार की बात है देवताओं के राजा इंद्र के दरबार में देव गुरु वृहष्पति पधारे. गुरु वृहष्पति के आने पर देवताओं ने उनके सम्मान में खड़े न होकर उनका अपमान कर दिया जिससे जो नाराज होकर कहीं अन्यत्र स्थान पर चले गए.

किस पाप का फल मिला स्त्रियों को

जिसके बाद देवताओं को मजबूरन विश्वरुप को अपना गुरु मानना पड़ा. किन्तु विश्वरुप देवताओं से छिपाकर कभी-कभी असुरों को भी यज्ञ-भाग दे दिया करता था जिससे कुपित होकर राजा ईन्द्र ने विश्वरुप का वध कर दिया था. गुरु हत्या के पाप से बचने के लिए ईन्द्र ने भगवान विष्णु की अराधना की जिसके फलस्वरुप यह पाप चार भागों में बांट दिया गया. जो कि वृक्ष, स्त्री, जल और भूमी इन तीन हिस्सों में बाँट दिया गया.

यानि सदियों से स्त्रियां उस पाप को भोग रही हैं जो उन्होंने कभी किया ही नही. लेकिन, उन्हें घर की रसोई में या मंदिर में पुजा-अर्चना करने से नहीं रोका गया था. दरअसल, महावारी के दौरान स्त्रीयों के शरीर से बेहद रक्त का स्त्राव होता है इसलिए उन्हें आराम की सख्त जरुरत होती है. पहले की स्त्रीयों कर्म को धर्म समझती थीं वो पुजा-पाठ के बिना एक दिन भी नहीं रह सकती थीं. इसलिए उन्हें आराम देने के लिए महावारी के दौरान पालन करने हेतु कुछ नियम बना दिये गए. जिन्हें अपना धर्म समझकर आज भी महिलाएं पालन करती हैं.

विज्ञान क्या कहता है

किसी धर्म या शास्त्र में ये कतही नहीं कहा गया कि महावारी के दौरान स्त्रीयां अछूत हो जाती हैं. पहले के जमाने में सैनिटरी पैड जैसे कोई वस्तु नहीं थी इसलिए साफ-सफाई को ध्यान में रखते हुए उन्हें एक एकांत कमरे में रहना होता था. आज वो तमाम सुविधायें हैं जो महावारी के दौरान मददगार साबित हो सकते हैं.

विज्ञान की मानें तो स्त्रीयों में महावारी एक बॉयलोजिकल प्रोसेस होते हैं. जो इस बात के संकेत होते हैं कि वो नये जीवन को जन्म देने में सक्षम है. इस दौरान होने वाले पीड़ा को ध्यान में रखकर डॉक्टर उन्हें उचित आराम की सलाह देते हैं. इसलिए ये एक अंधविश्वास मात्र है जो लोग पीरियड्स के दौरान महिलाओं को अछूत या घृणा का दृष्टी से देखते हैं.

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